Pujya Bapu Ji's Message
पूज्य संत श्री आशारामजी बापू के विचार
“सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, अपने भीतर की शांति में छिपा है।
जब मन निर्मल होता है, तब जीवन स्वतः ही सुंदर बन जाता है।
सेवा, सदाचार और संयम से ही मानव जीवन सार्थक होता है।
दूसरों के दुःख में सहभागी बनना ही सच्ची भक्ति है।
जो स्वयं को जीत लेता है, वही संसार को जीत सकता है।
क्रोध पर विजय, लोभ पर नियंत्रण और अहंकार का त्याग — यही आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग है।”